शाहिद को अम्मी ने खुश कर दिया -2


desi kahani शाहिद : मैं दिल मैं थोड़ा सा शर्मिन्दा भी हो गया लेकिन मैंने छुपाते हुये कहा जी वो बस अभी रहने दे इस बात को. वेसे भी शादी के बाद आदमी की आज़ादी और खुशियाँ सब ख़त्म हो जाती हैं.
अम्मी जी: ओये यह तुम से किसने कहा की मैं खुश नही हूँ.
शाहिद : जी वो तो हैं.
अम्मी जी: हाँ वेसे तुम कहते सही हो शादी के बाद इंसान की खुशीया ख़त्म हो जाती है अगर ओलाद तुम जेसी हो जो मेरी कोई बात नही सुनते.
शाहिद : अम्मी जी आप फिर शुरु हो गयी .
अम्मी जी : बेटा तुम से किसने कहा है मैं खुश हूँ हाँ यह सच है मैं खुश नहीं हूँ. और इसकी एक वजह तुम भी हो.
शाहिद : और दूसरी वजह अम्मी जी
अम्मी जी : वो भी कोई है तुम छोड़ो इस बात को बेटा थोड़ा सा माँ का ख्याल भी कर लिया करो.
अच्छा अच्छा अब लेक्चर देना बस भी करो मुझे नींद आ रही हैं. और मैं करवट बदल कर सो गया. अगले दिन रेहाना स्कूल से जल्दी घर आ गयी और उसने बताया की कल उनके स्कूल वाले उन सब को ट्रिप पर कही ले जा रहे हैं दो दिनो के लिये इसलिये आज जल्दी छुट्टी दे दी है. लेकिन अम्मी जी को मनाना मुश्किल था. रेहाना ने मुझे कहा भाई आप कुछ करिये. मैं अम्मी जी के पास गया और उनसे कहा अम्मी जी प्लीज रेहाना स्कूल ट्रिप के साथ जाना चाहती है उसे जाने दे. शाहिद मैं उसे इजाज़त नही दे सकती. अम्मी जी प्लीज. शाहिद तुमने कभी मेरी कोई बात मानी है जो मैं मानू. मैंने हसंते हुये कहा अच्छा आगे से मानूंगा. मैं जानती हूँ तुम झूठ बोल रहे हो लेकिन चलो तुम्हे अज़मा लेते है. ठीक है मेरी तरफ़ से रेहाना को इजाज़त है. मैं रेहाना के कमरे मैं गया और उसे यह खबर दी वो बहुत खुश हुई और बोली थैंक यू भाई. कोई बात नही और मैं नई शरारत से उसके मुँह पर हल्का सा थपड़ मारा. भाई मैं तुम्हे छोडूगी नही. मैं ज़ोर से हंसा. अगले दिन सुबह सुबह रेहाना चली गयी .
अब अम्मी जी ने मुझे कहा अब तुम बाहर ना जाना दो दिन मैं घर मैं अकेली हूँ. अच्छा तो अब मैं आप की चोकीदारी के लिये बेठा रहूं. शाहिद तुम हर बात का उलटा जवाब ना दिया करो मैं तुम्हारी माँ हूँ कभी सही तरह भी बात किया करो. अच्छा ठीक है ठीक है. उस दिन अम्मी जी ने मेरी पसन्द का खाना बनाया. और जब मैं खाना खा चुका था तो मेरी झूठी प्लेट मैं उन्होने खाना शुरु कर दिया. शाम को अम्मी जी जब चाय बना रही थी तो वो एक खाली कप ले कर बाथरूम मैं चली गयी और फिर जब वो थोड़ी देर बाद बाहर आईं तो मैं ये देखने के लिये उठा की कप मैं क्या है तो कप मैं दूध था. मैंने पूछा यह बाथरूम से दूध कहाँ से आया. क्यो तुम्हे क्या और फिर अम्मी जी ने वो दूध चाय मैं डाल दिया. जब मैं चाय पी रहा था तो अम्मी जी ने मुझसे पूछा आज चाय का स्वाद केसा है अच्छा है ना. हाँ लेकिन आज आपने इस मैं कुछ ख़ास डाला है क्या. हाँ यही समझ लो. और वो मेरी तरफ देख कर थोड़ा सो मुस्करा दी.
अम्मी जी : बेटा उस दिन मैंने तुम से तुम्हारी शादी की बात की थी याद है ना तुम्हे
शाहिद : जी हाँ याद है. तो फिर
अम्मी जी : तो फिर क्या तैयारी कर लो.
शाहिद : जी पर किससे और इतनी जल्दी अभी मेरी उम्र ही क्या है.
अम्मी जी : अच्छा जी चलो नही करती तुम्हारी शादी मगर?
शाहिद : मगर क्या. आप खामोश क्यो हो गयी हैं.
अम्मी जी : चलो छोड़ो बाद मैं बात करेगे.
शाहिद : अच्छा जेसी आप की मर्ज़ी.
तो दोस्तों अम्मी जी सुबह से काफ़ी परेशानी में इधर उधर फिर रही थी आख़िर मैंने पूछ ही लिया क्या बात है. वो बोली बेटा आज सुबह से ही मेरी कमर मैं दर्द है रेहाना भी नही है वरना वो थोड़ी

सी मालिश कर देती अगर तुम कर दो तो लेकिन मैं जानती हूँ तुम्हे माँ का ख्याल कहाँ है. अच्छा अच्छा हर वक़्त गुस्सा ना करती रहा करो चलो. अम्मी जी अपने बेड पर उल्टा लेट गयी मैंने उनकी कमीज़ थोड़ी सी उपर उठाई और आहिस्ता आहिस्ता मालिश करने लगा के मेरी नज़र अम्मी जी के कुल्हो की तरफ गयी जहाँ से सलवार थोड़ी सी नीचे गयी हुई थी पहली दफ़ा उस वक़्त मुझे दिल मैं कुछ महसुस हुआ और मेरा लंड खड़ा हो गया. अब अम्मी जी ने अपनी कमीज़ और उपर कर ली और उनका सफेद ब्रा नज़र आने लगा. मुझे पसीना आ गया और शायद अम्मी जी ने भी यह बात महसूस कर ली और मुझे कहा शाहिद क्या हुआ ए.सी चालू कर लो अगर गर्मी है तो और फिर वो मुस्कुरा दीं. और फिर अचानक वो उठ कर बेठ गयी और बोली शाहिद एक बात कहूँ अगर गुस्सा ना करो तो.

मेरे उस वक़्त वेसे ही पसीने छूट रहे थे मैंने कहा बोलीये. तुम शादी कर ही लो. आप फिर. तुम फिर गुस्सा हो रहे हो. वेसे भी तुम्हारी यह हालत देख कर ही मैं तुम्हे सुझाव दे रही हूँ. कोन सी हालत मैंने अंजान बनते हुये कहा. उन्होने मेरे बाल ठीक करते हुये कहा बेटा मैं तुम्हारी माँ हूँ मैं सब जानती हूँ. आप पता नही क्या जानती हैं मुझे कुछ समझ नही आ रहा और मैं शर्मिन्दगी छुपाने के लिये कमरे से बाहर आ गया. और पूरा दिन अपने कमरे मैं बेठा रहा और सोचता रहा यह सब अम्मी जी क्यो कह रही हैं. शाम को अम्मी जी मेरे कमरे मैं आईं और बोली शाहिद क्या हुआ आज तुम ने खाना भी नही खाया. सुबह से कमरे मैं बेठे हो. कुछ नही शान्ति से कमरे मैं तो बेठने दो। अरे बेटा मैंने तो ऐसे ही पूछ लिया था. तुम तो हर वक़्त नाराज़ ही रहते हो. चलो आओ बाहर कुछ खा लो. अच्छा चलो. अम्मी जी ने मुझे कुछ खाने को दिया और खुद मेरे पास बेठ कर मुझे देखने लगी. मैं बोला अब आप मुझे क्यो घूर रही है. नही मैं तो सिर्फ़ कहना चाहती थी तुम्हे पेसे तो नही चाहिये. पेसे किस को नही चाहिये. अच्छा ठहरो और वो अंदर चली गयी और वापस आ कर मुझे 5 हज़ार रुपए दिये. मैं हेरान हो कर उन्हें देखने लगा. तो वो बोलीं मैंने सोचा तुम्हे ज़रूरत होगी. शुक्र है आप को भी यह एहसास हुआ.

बेटा मुझे तो शुरु से ही एहसास है बस तुम ही. अच्छा ठीक है सुन लिया और मैं पेसे ले कर बाहर निकल गया. पीछे से अम्मी जी की आवाज़ आई जल्दी वापस आ जाना मैं अकेली हूँ. मैं रात को देर से वापस आया. अम्मी जी मेरा इंतज़ार कर रही थी वो बोलीं तुम्हे समझ में नही आता मैंने कहा था जल्दी आना. और उन्होने मुझे थोड़ा सा डाट दिया. और मैं गुस्से मैं अपने कमरे मैं चला गया. वो थोड़ी देर बाद मेरे कमरे मैं आईं और कहा चलो खाना खा लो और आज मेरे कमरे मैं ही सो जाना. मैं गुस्से से बोला मुझे खाना नहीं खाना है और ना ही आप के कमरे मैं सोना है आप चली जाओ मेरे कमरे से मैंने यह सब काफ़ी ऊँची आवाज़ मैं कहा.

ऐसे वक़्त मैं रेहाना मुझे राज़ी कर लेती थी लेकिन आज वो भी नही थी. अगले दिन मैं सो कर उठा तो रेहाना वापस आ चुकी थी. उसने मुझे सलाम किया और मेरे सर पर थप्पड़ मार कर भाग गयी शरारत से. मैं भी उसके पीछे भागा. उसके बाद हम दोनो ने नाश्ता किया. उस दिन के बाद अम्मी जी बहुत कम बोलती और ज्यादा वक़्त खामोश ही रहती. बल्कि वो रेहाना से भी कम ही बात करती. मैं अपनी मन मर्ज़ी करता रहा और उन्होने अब मुझे क़िसी भी बात पर मना करना और समझाना भी छोड़ दिया. यानी मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया लेकिन रेहाना मुझे बताती थी की अकेले मैं अम्मी जी रोती रहती हैं की मैं उनकी बात नही सुनता. खैर इसी तरह दिन गुज़रते रहे और मैं कॉलेज जाने लगा. रेहाना भी 12वी मैं चली गयी .

Updated: April 30, 2019 — 9:25 pm
Meri Gandi Kahani - Desi Hindi sex stories © 2017
error:

Online porn video at mobile phone